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7 अक्टूबर 2026 इंडियन ऑर्थोपेडिक रूमेटोलॉजी डे पर अक्षत सेवा सदन में भव्य जागरूकता कार्यक्रम; 'जोड़ों का संरक्षण और प्रारंभिक उपचार' थीम पर विशेषज्ञों ने दी सलाह

7 अक्टूबर 2026 इंडियन ऑर्थोपेडिक रूमेटोलॉजी डे पर अक्षत सेवा सदन में भव्य जागरूकता कार्यक्रम; 'जोड़ों का संरक्षण और प्रारंभिक उपचार' थीम पर विशेषज्ञों ने दी सलाह


इंडियन ऑर्थोपेडिक रूमेटोलॉजी एसोसिएशन (IORA) द्वारा ग्लोबल ऑर्थोपेडिक फोरम (GOF) और फिजियो हेल्पिंग हैंड के सहयोग से आज यारपुर, पटना स्थित अक्षत सेवा सदन में एक विशाल गठिया (आर्थराइटिस) जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम पूरे देश में 'इंडियन ऑर्थोपेडिक रूमेटोलॉजी डे' के रूप में मनाए जाने वाले 7 अक्टूबर के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम 'जोड़ों का संरक्षण और प्रारंभिक उपचार' (Joint Preservation and Early Intervention) रखी गई थी।

कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन मुख्य अतिथि बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के माननीय मंत्री श्री संजय कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि बदलती जीवनशैली में जोड़ों की समस्याओं से बचने के लिए दैनिक जीवन में नियमित व्यायाम और संतुलित पौष्टिक आहार को शामिल करना अनिवार्य है। समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की इस पहल की सराहना की और बेहतर खान-पान पर जोर दिया।

डॉ. एस. एस. झा , एसोसिएशन के संरक्षक जी ने कहा देश की 1 प्रतिशत आबादी रूमेटाइड आर्थराइटिस से पीड़ित देश के मौजूदा चिकित्सा आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में भारत की लगभग 1 प्रतिशत आबादी रूमेटाइड आर्थराइटिस (आमवात/गठिया) से पीड़ित है, जिसके लिए सही समय पर उचित देखभाल और चिकित्सा प्रबंधन बेहद जरूरी है। आर्थराइटिस (गठिया) के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर उपचार शुरू करना बेहद जरूरी है। यह बातें डॉ. आर. एस. झा ने आर्थराइटिस अवेयरनेस कार्यक्रम के दौरान कहीं।

विशिष्ठ अतिथि प्रेम सिंह, गोल्डमैन - जी ने कहा मई महीने को गठिया जागरूकता माह (Arthritis Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान में खराब जीवनशैली के कारण बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

 ग्लोबल ऑर्थोपेडिक फोरम के अध्यक्ष डॉ. सरसिज नयनम ने कहा कि यदि बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर तुरंत इलाज शुरू कर दिया जाए, तो जोड़ों में होने वाली शारीरिक विकृति (Deformity) को पूरी तरह से रोका जा सकता है। जोड़ प्रत्यारोपण होना चाहिए

डॉ. अमूल्य कुमार सिंह - इंडियन ऑर्थोपेडिक रूमेटोलॉजी एसोसिएशन (IORA) के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष (President-elect) ने मुख्य व्याख्यान देते हुए कहा, "भारतीय आबादी में घुटने और कूल्हे की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन मरीजों को यह समझना होगा कि जॉइंट रिप्लेसमेंट (जोड़ प्रत्यारोपण) हमेशा 
इलाज का अंतिम विकल्प होना चाहिए। आज चिकित्सा विज्ञान में ऐसी कई सुरक्षित दवाएं और न्यूट्रिशनल उपलब्ध हैं, जो बिना किसी बड़े ऑपरेशन के मरीजों को दर्द से राहत देकर उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकती हैं।"

डॉ. संजय पांडे AIIMS जी ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में गठिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है, जिससे करोड़ों लोग प्रभावित हैं. अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि खराब जीवनशैली, गतिहीन दिनचर्या और पौष्टिक आहार की कमी के कारण 25 से 30 वर्ष के युवा भी तेजी से ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटॉइड अर्थराइटिस जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं. 

डॉ. अरुण कुमार PMCH - जी ने कहा कि यदि जोड़ों में दर्द, सुबह के समय 30 मिनट से अधिक जकड़न या सूजन की समस्या कुछ हफ़्तों से लगातार बनी हुई है, तो इसे बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

डॉ. रवि प्रकाश, अध्यक्ष जी ने कहा कि इस अवसर पर स्वास्थ्य संगठनों और चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा देश भर में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू किए जा रहे हैं ताकि इस बीमारी के बढ़ते मामलों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके

इस कार्यक्रम में 200 लोगो की निशुल्क हड्डियों की जांच की गई 150 से अधिक डॉक्टरों और फिजियोथेरेपिस्ट्स की रही उपस्थिति इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सेमिनार में डॉ. जिबेंदु चौधरी, डॉ. कर्नल विवेकानंद, डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. पीयूष कुमार सिंह, डॉ. शब्बाज़ खान, डॉ मनोज मिश्रा, डॉ अलका, डॉ निशांत कुमार, डॉ तेज प्रताप दो अमन डॉ राकेश और सहित पटना और आसपास के क्षेत्रों के 150 से अधिक वरिष्ठ डॉक्टरों, फिजियोथेरेपिस्ट्स और पैरामेडिकल स्टाफ ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में ग्लोबल ऑर्थोपेडिक फोरम के कोषाध्यक्ष डॉ. मनीष ने सभी आगंतुकों और चिकित्सा कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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