20 सितंबर 2026 को बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन और पटना ऑर्थोपेडिक सोसाइटी द्वारा Total Hip Replacement पर राष्ट्रीय CME का आयोजन किया गया
सोमवार, 21 सितंबर 2026
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20 सितंबर 2026 को बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन और पटना ऑर्थोपेडिक सोसाइटी द्वारा Total Hip Replacement पर राष्ट्रीय CME का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के 1100 से अधिक डॉक्टर जुड़े.
बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (BOA) और पटना ऑर्थोपेडिक सोसाइटी (POS) के संयुक्त तत्वावधान में आज राजधानी पटना के होटल चाणक्य में Total Hip Replacement (टोटल कूल्हा प्रत्यारोपण) और इसकी जटिलताओं से निपटने के उपाय के बारे में, इस विषय पर एक उच्च स्तरीय राष्ट्रीय CME का सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सत्र में जहां पटना के 100 से अधिक लब्धप्रतिष्ठित डॉक्टरों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, वहीं ऑनलाइन माध्यम से देश भर के 1000 से अधिक सर्जन इस शैक्षणिक महाकुंभ से जुड़े और सक्रिय रूप से चर्चा की। इस कार्यक्रम को ज़ुवेंटस (Zuventus) का सहयोग प्राप्त था।
कार्यकर्म में मुख्य: अतिथि बिहार सरकार के माननीय ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री श्री सुनील कुमार जी उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी चिकित्सकों को सम्मानित किया। मंत्री महोदय ने चिकित्सकों के योगदान की सराहना करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों ने इस सम्मान के लिए मंत्री महोदय के प्रति आभार व्यक्त किया।
बिहार सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर भगवान के दूसरे रूप होते हैं। वे समाज की सेवा करते हुए लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा की पहले लोग ज्वाइंट रिप्लेसमेंट कराने देश विशेषज्ञ थे अब कुशल पूर्वक सभी तरह के ईलाज बिहार के धरती पटना में ही उपलब्ध है इसके लिए मैं चिकित्सक को दिल से धन्यवाद देता हूं। बिहार के डॉक्टर काफी उन्नत, कुशल एवं योग्य हैं और चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। उन्होंने डॉक्टरों के योगदान की सराहना करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
पद्मश्री डॉ. आर. एन. सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में देश के जाने-माने हिप रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ—नई दिल्ली से आए डॉ. राकेश महाजन और हैदराबाद के डॉ. चंद्रशेखर बतौर मुख्य वक्ता (Guest Speakers) शामिल हुए। उन्होंने जटिल कूल्हा प्रत्यारोपण की आधुनिक तकनीकों और पेचीदा मामलों को संभालने के व्यावहारिक उपाय के बारे में सिखाए।
डॉ. अमूल्य कुमार सिंह विषय प्रवेश कराते हुए बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमूल्य कुमार सिंह ने कहा, यह सर्जरी मुख्य रूप से कूल्हे के असहनीय दर्द से राहत दिलाने और चलने-फिरने की क्षमता को सुधारने के लिए की जाती है। "वर्तमान समय में भारतीय मरीजों में कूल्हे के जोड़ों (Hip Joint) की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। मरीजों के जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) को सुधारने के लिए अब नियमित रूप से टोटल हिप रिप्लेसमेंट (THR) किया जा रहा है। हालांकि, कई बार सर्जरी के बाद कुछ जटिलताएं (Complications) भी सामने आती हैं, और दोबारा की जाने वाली रिवीज़न सर्जरी हमेशा बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिन होती है। इस सीएमई का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों को यह सिखाना है कि पहली बार में ही सर्वश्रेष्ठ टोटल हिप रिप्लेसमेंट कैसे करें, और यदि कोई समस्या या विफलता आती है, तो अगली सर्जरी (Revision Surgery) को पूरी सटीकता और सफलता के साथ कैसे अंजाम दें।
अतिथि वक्ता के रूप में - डॉ. राकेश महाजन — नई दिल्ली, डॉ. चंद्रशेखर — हैदराबाद
चेयरपर्सन - के रूप में डॉ. रंजीत सिंह, डॉ. अशोक के. सिन्हा
पैनलिस्ट के रूप में, डॉ सुदीप कुमार, डॉ रमाकांत कुमार, डॉ मनोज कुमार जाट, डॉ अश्वनी गौड़, डॉ कर्नल संतोष के सिंह,
"विफल हिप रिप्लेसमेंट की चुनौतियों पर हुई गहन पैनल चर्चावैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता (Chair) विख्यात सर्जन डॉ. रंजीत सिंह और डॉ. अशोक कुमार सिन्हा ने की।
पूरे सत्र का कुशल संचालन (Moderation) डॉ. निशिकांत द्वारा किया गया, जिसमें फेल हो चुके (विफल) टोटल हिप रिप्लेसमेंट को सुधारने की बारीकियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान आयोजित विशेष पैनल चर्चा में पैनलिस्ट के रूप में शामिल डॉ. सुदीप, डॉ. रमाकांत, डॉ. कर्नल संतोष सिंह, डॉ. अश्विनी गौरव और डॉ. मनोज नाग ने कूल्हा प्रत्यारोपण से जुड़ी सभी संभावित जटिलताओं और उनके सटीक वैज्ञानिक समाधानों को विस्तार से साझा किया।
इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक सम्मेलन में बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. रितेश रुनू, पटना ऑर्थोपेडिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. जिबेंदु चौधरी और पटना ऑर्थोपेडिक सोसाइटी के सचिव डॉ. अर्नब सिन्हा विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे वैज्ञानिक कार्यक्रमों से न केवल डॉक्टरों का ज्ञानवर्धन होता है, बल्कि आम मरीजों को भी विश्वस्तरीय चिकित्सा का लाभ राज्य में ही मिल पाता है।
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