कांग्रेस समाजिक न्याय के तहत् जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी देगी : राजेश राम
सोमवार, 24 अगस्त 2026
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धारा 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाकर शोषित-वंचित मुस्लिम जातियों को भी मिले एससी आरक्षण का लाभ :डॉ. मो. अनवर
कांग्रेस समाजिक न्याय के तहत् जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी देगी : राजेश राम
सामाजिक न्याय, समानता और सम्मान की लड़ाई को मजबूत करने के लिए दलित-मुस्लिम संवाद जरूरी : इजरायल मंसूरी
पटना / हाजीपुर (वैशाली) महादलित मुस्लिम फाउंडेशन के तत्वावधान में पटना के दरोगा राय पथ स्थित स्वतंत्रता सेनानी भवन में दलित-मुस्लिम संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महादलित मुस्लिम फाउंडेशन के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मो. अनवर ने की, जबकि संचालन इदरिसीया दर्ज़ी फेडरेशन, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष राजू वारसी ने किया। कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। संवाद में दलित, अतिपिछड़े, पसमांदा एवं विशेष रूप से वंचित मुस्लिम समुदायों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने संविधान में समानता, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के अधिकार को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में दलितों, अतिपिछड़ों और विशेषकर अतिपिछड़े मुसलमानों के सामने मौजूद चुनौतियों, अधिकारों और सामाजिक न्याय के सवालों पर सार्थक संवाद जरूरी है। राहुल गांधी जी की सामाजिक न्याय की मुहिम का मूल मंत्र है— “जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।” उन्होंने कहा कि समाज के हर वंचित और पिछड़े वर्ग को उसका हक, सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। सामाजिक न्याय की इस लड़ाई को गांव-गांव और समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने तथा संविधान के बराबरी के अधिकार को धरातल पर मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कार्यक्रम में आमंत्रित करने के लिए आयोजक मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।
राजद के पूर्व मंत्री सह राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी/एसटी प्रकोष्ठ, शिवचंद्र राम ने जोशीले अंदाज में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को संविधान देकर वंचित एवं शोषित वर्गों को संवैधानिक अधिकार और सत्ता में भागीदारी का रास्ता दिया। उन्होंने सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने के लिए एकजुटता का आह्वान किया।
राजद के पूर्व मंत्री इजरायल मंसूरी ने कहा कि सामाजिक न्याय, समानता, सम्मान और हक की लड़ाई को मजबूती देने के लिए ऐसे संवाद बेहद जरूरी हैं। आपसी भाईचारे, एकजुटता और साझी आवाज के साथ वंचित एवं पिछड़े समाज के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना होगा।
महादलित मुस्लिम फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मो. अनवर ने बिहार भर से आए धोबी (हवारी) समाज तथा सभी वर्गों के लोगों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर फाउंडेशन आने वाले दिनों में अपना संघर्ष और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 341 में धार्मिक प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
इदरिसीया दर्ज़ी फेडरेशन, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष राजू वारसी ने कहा कि धारा 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाए बिना संघर्ष रुकेगा नहीं। उन्होंने कहा कि वंचित समाज को संवैधानिक अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए व्यापक एकजुटता की जरूरत है। राजू वारसी ने सभा में मौजूद सभी लोगों को 10 सितंबर 2026 को पटना के रविन्द्र भवन में आयोजित वीर अब्दुल हमीद शहादत दिवस समारोह सह इदरिसीया दर्ज़ी अधिकार सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया और अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का विशेष आग्रह किया।वही हॉकर्स फोरम सह इंसाफ के महासचिव एवं सीपीआई नेता इरफान अहमद फातमी ने कहा कि उनकी पार्टी वंचित समाज की मांगों का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि एनडीए की ओर से अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाने के लिए कोई विधेयक लाया जाता है तो वे उसका पूर्ण समर्थन करेंगे और इस संघर्ष में एकजुटता के साथ खड़े रहेंगे। वही कैप्टन अब्दुल हमीद हवारी ने कहा कि अनुच्छेद 341 में धार्मिक प्रतिबंध लगाए जाने के कारण धोबी (हवारी) समाज सहित वंचित मुस्लिम जातियों को आरक्षण के अधिकार से वंचित किया गया है। उन्होंने समाज को एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। वही ईवा फाउंडेशन की संस्थापक सह हाईकोर्ट अधिवक्ता सविता अली ने कहा कि मुस्लिम समाज की कई जातियों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति दलितों से भी बदतर है। उन्होंने कहा कि उनका संगठन वंचित समाज को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र के समक्ष भी मुस्लिम समाज के वंचित वर्गों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूती से रखा जाएगा। वहीं इंसाफ अधिकार मंच के प्रदेश अध्यक्ष सूरज कुमार सिंह ने कहा कि 2014 के बाद मुस्लिम युवाओं को आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के मामलों में उनके संगठन ने इंसाफ की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को आबादी के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी दिलाने के लिए “हक-ए-नुमाइंदगी, उम्मीदें बिहार” आंदोलन को पूरे बिहार में तेज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिहार के मुसलमान अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए गांधी मैदान में एकजुट होंगे और इसके लिए समाज के सभी साथियों से साथ आने की अपील की। वही महादलित मुस्लिम फाउंडेशन के महासचिव इंजीनियर तनवीर असरफ हवारी ने शायरी के माध्यम से समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि सामाजिक विकास, शिक्षा और अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर संघर्ष तेज करना होगा। उन्होंने समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने पर भी जोर दिया। वही हवारी विकास मंच के संस्थापक सह अध्यक्ष आश मोहम्मद ने कहा कि अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाकर हक और अधिकार मिलने तक संघर्ष एवं आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस डॉ. मो. अनवर को उम्मीदवार बनाती है तो उनका संगठन और समाज उनके समर्थन में पूरी ताकत लगाएगा। वहीं मो. सुभान अली ने कहा कि अनुच्छेद 341 में बदलाव की मांग को लेकर संघर्ष को और तेज करना होगा। मो. इजरायल अली ने समाज से एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने का आह्वान किया। वही मो. इदरिसी ने अनुच्छेद 341 के ऐतिहासिक प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति की पहचान में धार्मिक प्रतिबंध लागू किया गया था, जबकि बाद में सिख और बौद्ध धर्मावलंबियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया गया। उन्होंने राष्ट्रपति महोदया से मांग की कि अनुच्छेद 341 में आवश्यक संशोधन कर मुस्लिम समुदाय की वंचित जातियों को भी अनुसूचित जाति के अधिकारों के दायरे में शामिल किया जाए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष, वैशाली अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के साथ-साथ शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता इम्तेयाज अहमद ने कहा कि गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और उनके स्कूल के माध्यम से प्रत्येक वर्ष सैकड़ों बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रयास पूरे बिहार में होना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता, सम्मान, राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण संघर्ष को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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