एस.एम. अशरफ फ़रीद, प्रो. तौकीर आलम, डॉ. अशरफुन्नबी क़ैसर, डॉ. रैहान गनी एवं डॉ. अनवरुल हुदा के हाथों पुस्तक "खामोश इंकलाब" का लोकार्पण
बुधवार, 8 जुलाई 2026
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हाजीपुर/चेहराकलां (मोहम्मद आसिफ अता) वैशाली जिले के चेहराकलां प्रखंड स्थित प्रसिद्ध मदरसा अहमदिया, अबूबकरपुर में मौलाना एजाज़ करीम क़ासमी द्वारा लिखित पुस्तक "खामोश इंकलाब" का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। पुस्तक में मौलाना अब्दुल कय्यूम शम्सी के जीवन, सेवाओं और शैक्षणिक योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं उर्दू एक्शन कमेटी बिहार के अध्यक्ष तथा दैनिक कौमी तंजीम के प्रधान संपादक एस.एम. अशरफ फ़रीद ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को आपसी एकता, भाईचारे और सद्भाव की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों, मस्लकी मतभेदों, ईर्ष्या और वैमनस्य को छोड़कर एक आदर्श समाज के निर्माण के लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने इस अवसर पर इस्लामी इतिहास तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उलेमा की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि मौलाना एजाज़ करीम क़ासमी की पुस्तक "खामोश इंकलाब" अत्यंत उपयोगी, शोधपरक और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने मदरसा प्रशासन और आयोजन समिति को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी।
पूर्व कुलपति प्रो. तौकीर आलम ने कहा कि छात्र जीवन में उन्हें इसी मदरसे से शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला था और इस क्षेत्र से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मौलाना अब्दुल कय्यूम शम्सी के जीवन और सेवाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
उर्दू एक्शन कमेटी बिहार के महासचिव डॉ. अशरफुन्नबी क़ैसर ने कहा कि मौलाना अब्दुल कय्यूम शम्सी ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा का दीप जलाया और मदरसा स्थापित कर समाज में ऐतिहासिक कार्य किया। उनकी सेवाओं को सदैव याद रखा जाएगा।
कमेटी के उपाध्यक्ष डॉ. रैहान गनी ने कहा कि आज पुस्तकों का प्रकाशन तो बढ़ रहा है, लेकिन पाठकों की संख्या कम होती जा रही है। उन्होंने नई पीढ़ी में उर्दू भाषा और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उर्दू एक्शन कमेटी बिहार के सचिव डॉ. अनवरुल हुदा ने मदरसा अहमदिया की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन और भव्य परिसर की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मदरसा के कारी अख़लाक़ की पवित्र कुरआन की तिलावत से हुआ, जबकि नात कारी फरहान एवं हाफ़िज़ एजाज़ करीम ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा के पूर्व प्रधानाचार्य मौलाना मज़ाहिर आलम ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में पुस्तक के लेखक की मेहनत की सराहना करते हुए मौलाना अब्दुल कय्यूम शम्सी की शैक्षणिक, सामाजिक और विशेष रूप से महिला शिक्षा के क्षेत्र में दी गई सेवाओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल, बिहार के महासचिव मुफ्ती नाफ़े आरिफ़ी ने भी विचार व्यक्त किए। मौलाना नज़रुल हुदा क़ासमी ने पुस्तक पर विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की।
समारोह में सभी अतिथियों का शॉल एवं पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया। मंच संचालन एजाज़ आदिल, कलीम अशरफ तथा मौलाना कमर आलम नदवी ने संयुक्त रूप से किया। इसी अवसर पर जिला उर्दू टीचर्स एसोसिएशन, वैशाली के महासचिव डॉ. ज़ाकिर हुसैन द्वारा तैयार किए गए शिक्षा जागरूकता बैनर का भी लोकार्पण किया गया, जिसमें "जो पढ़ेगा, वही बढ़ेगा" जैसे प्रेरक संदेश शामिल थे।
कार्यक्रम में मोहम्मद अज़ीमुद्दीन अंसारी, प्रो. तौकीर सैफ़ी, मोहम्मद शाहनवाज़ अता, अब्दुल कादिर बहारी, मोहम्मद दिलशेर, शराफ़त ख़ान, ज़ाहिद वारसी, मुफ़्ती जमाल क़ासमी, मौलाना आदिल फ़रीदी, मौलाना मुईनुर्रशीद नदवी, हाफ़िज़ ज़फ़रुल्लाह, मास्टर शकील अहमद, मास्टर शमशाद अहमद, मोहम्मद कामरान, मुफ़्ती तौकीर आलम क़ासमी, मौलाना आसिफ़ जमील क़ासमी, मौलाना फ़िरदौस मदनी, मुफ़्ती इब्राहीम नदवी, कारी फ़रहान इरफ़ानी, मौलाना वहाजुल हुदा क़ासमी, मौलाना राफ़े क़ासमी, मौलाना मोहम्मद हदीस, क़ाज़ी मोहम्मद शाहनवाज़, पूर्व मुखिया मोहम्मद कमालुद्दीन, मास्टर अमीरुल हक़, राजद नेता सरफ़राज़ एजाज़, कारी मोहम्मद अख़लाक़, हाफ़िज़ मोहम्मद असजद, हाजी शम्सुल हक़, नैयर हबीब, सफ़वानुल क़मर शम्सी सहित बड़ी संख्या में उर्दू प्रेमी, शिक्षाविद, उलेमा और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन मौलाना मज़ाहिर आलम की दुआ तथा मौलाना एजाज़ करीम क़ासमी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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