बक्सर की ऐतिहासिक पहचान 'बक्सर की पापड़ी' को मिले GI टैग एवं 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' में स्थान, नहीं तो होगा आंदोलन: राजकुमार चौबे*
शनिवार, 20 जून 2026
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बक्सर : विश्वामित्र सेना द्वारा बक्सर की पारंपरिक एवं ऐतिहासिक पहचान 'बक्सर की पापड़ी' को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिलाने तथा इसे GI टैग (Geographical Indication) एवं वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना में शामिल किए जाने की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
प्रेस वार्ता की अध्यक्षता विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक श्री राजकुमार चौबे ने की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में बक्सर की पापड़ी को उसकी ऐतिहासिक पहचान वापस दिलाने की मांग का समर्थन किया तथा विश्वामित्र सेना के इस अभियान को अपना पूर्ण सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संयोजक श्री राजकुमार चौबे ने कहा कि विश्वामित्र सेना लगातार बक्सर की सनातन संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर एवं पारंपरिक पहचान को संरक्षित करने के लिए संघर्ष करती रही है। उन्होंने कहा कि बक्सर की पापड़ी कभी देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती थी। यह मिठाई भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भी पसंदीदा मिठाइयों में शामिल थी, लेकिन आज इसकी पहचान धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। श्री चौबे ने कहा, "हमारी मांग है कि बक्सर की पापड़ी को GI टैग प्रदान किया जाए तथा इसे 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना में शामिल किया जाए। यदि सरकार इस ऐतिहासिक मिठाई को उसका अधिकार नहीं देती है तो विश्वामित्र सेना जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।"
उन्होंने आगे कहा कि यदि बक्सर की पापड़ी का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए तो इससे जिले में बड़े पैमाने पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय उद्योग को नई पहचान मिलेगी और बक्सर की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी। जिस प्रकार मिथिलांचल का मखाना और देश के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक मिठाइयों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान मिली है, उसी प्रकार बक्सर की पापड़ी भी अपनी विशिष्ट गुणवत्ता एवं स्वाद के कारण इस सम्मान की पूर्णतः हकदार है।
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