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फेफड़े संबंधित रोगों के उपचार के लिए बिहार पलमोनरी सम्मेलन का हुआ आयोजन

फेफड़े संबंधित रोगों के उपचार के लिए बिहार पलमोनरी सम्मेलन का हुआ आयोजन


फेफड़े संबंधित रोगों के उपचार के लिए बिहार पलमोनरी सम्मेलन का हुआ आयोजन

देश के करीब 700 फेफड़े संबंधित आम बीमारियों के चिकित्सक शामिल हुए

पटना। इंडियन चेस्ट सोसाइटी, बिहार चैप्टर के अधीन बिहार पलमोनरी सम्मेलन (BIPCON- 2023) का आयोजन ऊर्जा ऑडिटोरियम, पटना में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता बिहार के उप मुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री श्री तेजस्वी यादव थे। डॉक्टरों को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा की सांस से संबंधित रोगों में वृद्धि और वायु प्रदूषण का एक दूसरे से संबंध है और सरकार को प्रति परिवार कारों की संख्या सीमित करने तथा एक समय में सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या तय करने वाली नीति पेश करनी चाहिए। इस सम्मेलन में देश के 12 राज्यों से करीब 700 चिकित्सक शामिल हुए। डॉ एस. के मधुकर लंग्स हॉस्पिटल पटना एवं डॉ प्रकाश सिन्हा, पारस हॉस्पिटल पटना के द्वारा यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देश के विख्यात चिकित्सक डॉ रणदीप गुलेरिया, डॉ दीपक तलवार निर्देशक मेट्रो हॉस्पिटल दिल्ली, डॉ आर विजय कुमार, डॉ सित्तु सिंह, डॉ सुजीत राजन, डॉ टिंकू जोसेफ, डॉ प्रतिभा सिंघल, डॉ सुष्मिता राय चौधरी, डॉ विकास ओसवाल, डॉ देवराज जंस जैसे विख्यात चिकित्सक इसमें शिरकत किए। इंडियन चेस्ट सोसाइटी द्वारा यहां आयोजित श्वांस रोग सम्मेलन के मौके पर पारस अस्पताल के डॉ प्रकाश सिंह ने कहा कि वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया की तत्काल प्रभाव आंखों और गले में जलन के रूप में होते हैं। इसके अलावा, दमे का दौरा पड़ने की गंभीरता में भी वृद्धि हुई है।”सम्मेलन का आयोजन वायु प्रदूषण और उससे होने वाली बीमारियों के साथ-साथ श्वांस रोगों के क्षेत्र में प्रगति पर चर्चा करने के लिए किया गया था।


लंग्स हॉस्पिटल पटना के डॉक्टर डॉक्टर एस के मधुकर कहा कि वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक प्रभावों में श्वसन संबंधी बीमारियां और फेफड़ों का कैंसर शामिल हैं, और सबसे बुरी बात यह है कि पटना जैसे शहर में हमारे बच्चों में फेफड़ों की समस्याएं बढ़ रही है, जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों के विकार गंभीर रूप ले लेंगे। उन्होंने कहा, “हमारी सरकारें वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर से निपटने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही हैं। इसे एक परिवार के पास वाहनों की संख्या सीमित करने के लिए एक नीति लानी चाहिए और एक समय में सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या को भी सीमित करना चाहिए। साथ ही, कार पूलिंग को बढ़ावा देना चाहिए।”

वही दिल्ली मेट्रो हॉस्पिटल के संस्थापक डॉक्टर दीपक तलवार कहा, “श्वसन संक्रमण, लंबे समय तक फेफड़ों में समस्या और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ने से फेफड़ों की बीमारियां भारत में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गई हैं।

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